माँ दुर्गा से सीखें नेतृत्व के यह छह गुण | डॉ0 विजय शंकर मिश्र

नवरात्रि में हम देवी दुर्गा के रूप में शक्ति की पूजा करते हैं। आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों के विजय के रूप में दशहरा मनाया जाता है। हमारे अंदर भी कुछ बुरी ताकतें होती हैं जो हमारी अच्छाई पर हावी होना चाहती हैं। ऐसे में बुराई पर अच्छाई को प्रबल बनाने का संकल्प लेकर हमारे अंदर के बेहतरीन लीडर को तलाश और तरास सकते हैं

1.निडरता और अंदरूनी शक्ति:
दुर्गा शब्द दुर्गम से बना है जिसका तात्पर्य निडरता से है। चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति आ जाए, संकल्पों का साथ नहीं छोड़ना ही अंदरूनी शक्ति का परिचायक है। हम जितने अंदर से मजबूत होते हैं, बाहर उतनी ही निडरता का प्रदर्शन होता है। देवी दुर्गा शेर की सवारी करती हैं। मतलब यह है कि अगर आप निडर हैं तो कठिन एवं डरावनी स्थितियों में भी आप हिम्मत नहीं हारेंगे और विजयी बनकर उभरेंगे।

2.एक साथ कई कार्य करने की क्षमता:
देवी दुर्गा के आठ हाथ हैं। ये हमें एक साथ कई कार्य संपन्न करने (मल्टि टास्किंग) की क्षमता विकसित करने की सीख देते हैं। मल्टि टास्किंग से ना केवल समय की बचत होती है, बल्कि इससे हम मानसिक रूप से सक्रिय और चुस्त-दुरुस्त रहते हैं।

3.दूरदर्शिता और धैर्य:
देवी दुर्गा की किसी प्रतिमा को देखिए। हमें जो सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं, वो हैं- देवी दुर्गा का सुंदर, शांत और निर्मल चेहरा और मां की चौकस निगाहों में तो गजब की आकर्षण शक्ति होती है। बड़ी-बड़ी आखें 360 डिग्री दृष्टि की प्रतीक हैं ताकि आपको पता रहे कि आपको पहुंचना कहां है। लेकिन, सिर्फ लक्ष्य की जानकारी होने से यात्रा पूरी नहीं होती। एक शानदार लीडर-मैनेजर के लिए चौकस होना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहना।

4.परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने की क्षमता:
देवी दुर्गा के नौ अवतार हैं। नवरात्रि के दौरान अलग-अलग दिन मां के इन्हीं नौ अवतारों की पूजा होती है। इसके पीछे प्रबंधन की एक सामान्य सी सीख छिपी है। वह यह कि लीडर और मैनेजर को मौके की नजाकत के मद्देनजर अपने व्यक्तित्व और व्यवहार में बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। आपको अंदर से नहीं बदलना है। बस परिस्थितियों के मुताबिक शैली, स्वर, रुख, तरीके, भागीदारी और भूमिका में परिवर्तन लाएं।

5.दिलों को जोड़ने वाली कड़ी बनिए:
जिस तरह देवी दुर्गा पूजा और आस्था के जरिए लाखों दिलों को जोड़ती हैं। वैसे ही आप भी वह सूत्र बनिए जिससे एक के बाद एक लोग जुड़ते चले जाएं।

6.स्त्री शक्ति पर शक नहीं करते:
सबसे महत्वपूर्ण बात कि जब सभी ताकतवर देवता महिषासुर को रोक पाने में असमर्थ रहे तो मां दुर्गा ने उसका विनाश किया। यानी, अजेय को पराजित करने के लिए परमात्मा ने देवी दुर्गा का रूप धारण किया। इससे प्रबंधन की दुनिया और नागरिक समाज सबसे बड़ी सीख ले सकते हैं। वह यह कि नेतृत्व की क्षमता स्त्री या पुरुष होने पर निर्भर नहीं करती।

  • डॉ0 विजय शंकर मिश्र
Share Now

Related posts

Leave a Comment