सप्तरंगी गगन तले बच्चे कर रहे हैं प्रयोग सारिका घारू की खुली प्रयोगशाला में |

सप्तरंगी गगन तले बच्चे कर रहे हैं प्रयोग सारिका घारू की खुली प्रयोगशाला में 🎯महुये का वृक्ष बन रहा S ट्राइबल टोला टीचिंग की खुली प्रयोगशाला, 🎯टोले के तालाब की मदद से बच्चे समझ रहे हैं हैं जीवविज्ञान ट्राइबल टोला टीचिंग – 🎯विज्ञान गुनगुनाते हुये प्रयोग कर रहे हैं टोले के वनवासी बच्चे, प्रयोग के साथ विज्ञान के सिद्धांत को समझाने सारिका ने बनाई खुली प्रयोगशाला चारदीवारों से घिरी , तालों और आलमारियो वाली प्रयोगशाला अब टोला मंजीरा में नदी , पहाड़, झरने किनारे सप्तरंगी गगन के तले किसी वृक्ष…

एक एक पग धर मैं धरती से आकाश पदार्पण करती हूं | कवयित्री – प्रतिमा दीक्षित

एक एक पग धर मैं धरती से आकाश पदार्पण करती हूं। हैं पैर धरा शीश पर मैं अंतरिक्ष को धारण करती हूं।। ये देह धरा से जन्मी है ये देह धरा की पूंजी है। आकाश की है आत्मा पूंजी आकाश को अर्पण करती हूं।। एक एक पग धर……………..।। तुम पूर्ण ब्रम्ह अपूर्ण रूप जब तक न समाहित मैं समझूँ। तुम सुलझाओ सम्पूर्ण रूप, मैं अंश बनूँ फिर से उलझूँ।। मैं तन को पृथक पृथ्वी देखूँ और मन को मैं आकाश कहूँ। प्रकृति को मैं आधार कहूँ, आत्मा को मैं अवकाश…

अगर पास होते आप। कवयित्री जिगना “जिग्यासा”

कुछ आस कुछ पास कुछ होने का अहसास कुछ मन की आवाज रहने देते खुद के अंदाज तुम… रहने देते खुद के अंदाज.. तो महक जाते हमारे भी आगाज दिल के करीब हो तुम दिल के करीब हो ये बात समझ लेते तो होता हमारा भी कुछ अलग ही मिजाज लोगो की बातो का क्या आप पास होते तो लम्हा भी होता खास समझते आप हमे ये चाह रहती हमारी उनका ही ख्याल था अक्सर जो ठहरा रहा कुछ बाते जो अनकही सी रही काश… अगर पास होते आप। कवयित्री…

बाबूजी !! पिता के सम्मान की एक संरचना | कवि – शेखर “अस्तित्व”

कविता, ग़ज़लें, गीत, रूबाई, बाबूजी की देन है जी ! मेरा फक्कड़पन, सच्चाई, बाबूजी की देन है जी ! मेरे शब्दों का उथलापन, बेशक ! मेरा अपना है ! लेकिन भावों की गहराई, बाबूजी की देन है जी ! दसवीं तक बस दस प्रतिशत ही विद्यालय में पढ़ पाया ! नब्बे प्रतिशत मेरी पढ़ाई, बाबूजी की देन है जी ! बुरी आदतें जितनी भी हैं, वो सब मैंने बोई हैं ! जो कुछ मुझमें है अच्छाई, बाबूजी की देन है जी ! कृपा भले ही ईश्वर की हो, ज़रिया चाहे…

कही लिपटी हुई गठरी सी.. मेरी जिंदगी मिल जाए.. | कवित्रियी ” जिग्यासा “

कही लिपटी हुई गठरी सी.. मेरी जिंदगी मिल जाए.. कही से…. तुझे अहसासो की नमी मिल जाए .. मेरी बातो की तहजीब मिल जाए .. मैं रुठु तो दुआ मिल जाए .. मैं जागु की तुझे सदा मिल जाए .. तु समझे मुझे… तु बस … समझे मुझे… ऐसी कोई वफा मिल जाए … कसमे ली थी वो यादो मे… मिल जाए…. या फिर जीने की कोई ख्वाहिश हि…. मिल जाए … तुझे… मेरे अहसासो की …..फिर से …नमी मिल जाए….. A poem by – जिगना दोषी ” जिग्यासा “

दूर सन्नाटा हुआ है बंद ताले खुल गए | ज़िंदगी को फिर सँवरने के उजाले मिल गए | गीतकार संजय पुरुषार्थी

{मुखड़ा}👇 लाॅकडाउन अनलाॅक हुआ प्रतिबंध हटा कुछ साफ हुआ …………. {अंतरा}👇 थोड़ी राहत थोड़ा संशय थोड़ा जीवन संचार हुआ जीवन की सुरक्षा की खातिर ईजाद यही उपचार हुआ लाॅकडाउन…. प्रतिबंध हटा… लाॅकडाउन…. प्रतिबंध हटा…. है कठिन दौर से गुज़र रही हर जीवन की रफ्तार सही मिलकर सबको ही करना है फिर जीवन से व्यवहार यही लाॅकडाउन…. प्रतिबंध हटा… नियमों का पालन करना ही फिलहाल सही विचार यही निश्चित है मृत्यु मगर फिर भी जीवन करना बेकार नहीं लाॅकडाउन…. प्रतिबंध हटा…. करें प्रार्थना पूजा अर्चन कोरोना का हथियार यही जियें और…

कोरोना वैरियर्स “भारतीय पुलिस” के सम्मान में बना गीत “हम खाकी वर्दीधारी हैं..” का DD-UP ने किया प्रसारण

भारतीय पुलिस के सम्मान में बना गीत “हम खाकी वर्दीधारी हैं.. का “DD-UP ने किया प्रसारण जाने माने मशहूर ऐंकर, कवि, साहित्यकार संजय पुरुषार्थी का कोरोना वैरियर्स भारतीय पुलिस के पक्ष में लिखा गया गीत “हम खाकी वर्दीधारी हैं..कोरोना पर हम भारी हैं…बेमौत नहीं मरने देंगे… जन जन की जान हमारी है…” DEARFACTS.COM में सबसे पहले प्रकाशित प्रकाशित हुआ था। जिसे हमारे न्यूज पोर्टल पर पढ़कर तमिल, मलयालम और दक्षिण भारतीय सिनेमा के संगीतकार गायक नीरज सिंह ने जहाँ अपनी ही दिलकश आवाज़ में गा कर और अपने शानदार संगीत…

पहले स्वयं जागृत होकर, आओ सारा विश्व जगाएं | रचयिता – शिव मिश्रा

कई महीनों से अवसाद ग्रस्त (Depression) होने के कारण सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या कर लेने से आज जहाँ पूरा देश शोक संतप्त है वहीं “अवसाद” पूरे विश्व के सामने एक बड़ा सवाल बन कर खड़ा है । आज के इस दौर में क्या किशोर, क्या युवा, क्या वृद्ध सभी किसी न किसी मन की आंतरिक पीड़ा के कारण अवसादग्रस्त हैं। यही मानसिक पीड़ा जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है तो व्यक्ति एकांत प्रिय हो जाता है साथ ही उसके व्यवहार में एक अलग सा बदलाव आ जाता है…

सृष्टि का कारण तुम्हीं हो | कवयित्री – प्रतिमा दीक्षित

सृष्टि का कारण तुम्हीं हो। सृष्टि का विध्वंस हो तुम।। सत्य हो, सुंदर हो, शिव हो। शिष्ट और अपभ्रंश हो तुम। ध्यानमग्न शमशान में सारी ही सीमा से परे तुम। महायोगी हो त्रिलोकी और त्रिगुणातीत हो तुम।। हे प्रभु! संसार हेतु चंद्रशेखर रूप धरिए। मौन में संगीत रचिये। शून्य में श्रृंगार गढ़िये ।। जीव जग मत भोग समझो। काल तुमको भींच लेगा। जन्म बस जीवन नहीं है। मृत्यु मुख भी खींच ‌लेगा। कर्म हों शंकर सदृश, होकर के निर्विकार करिये त्रिकालदर्शी स्वयं हो कर शिव में एकाकार करिये। मौन का…

सोनू सूद को समर्पित, मजदूरों के दर्द को बयाँ करता गीत “मेरी माँ” | आपकी आँखें नम कर देगा | विडियो देखें

फिल्मी पर्दे पर खलनायक का किरदार निभाने के लिए मशहूर अभिनेता सोनू सूद असल जीवन में नायक के रूप में सामने आएं हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान फंसे प्रवासियों की मदद के लिए सामने आए सोनू सूद के सम्मान में शनिवार को “मेरी मां” नामक एक गीत जारी किया गया। इस गाने के बोल वंदना खंडेलवाल ने लिखे हैं और राहुल जैन ने गाने को अपनी आवाज दी है। ये गीत लॉकडाउन में आई मुसीबत के समय के आसपास घूमता है। इसमें दिखाया गया है कि जब देश भर…