जानें नवरात्रों में कन्या पूजन करने का महत्व, कन्या पूजन के बाद भुलकर भी ना करे ये 3 काम !

माता की प्रसन्नता के लिए नवरात्रों में अष्टमी अथवा नवमी के दिन कन्या पूजन कर उन्हें खाना खिलाने का का विधान है।अष्टमी के दिन नवरात्रों का परायण करने वाले अष्टमी के दिन अपने व्रतों का भी परायण करते है | नवमी के दिन नवरात्रों का परायण करने वाले नवमी के दिन अपने व्रतों का भी परायण करते है। कुमारी कन्या माँ का प्रत्यक्ष स्वरूप है , कुमारी पूजन का इस व्रत के लिए सबसे अधिक महत्व है। इसके लिए 2-10 वर्ष की आयु वाली कन्या पूजन योग्य मानी जाती है…

राम भक्त ‘हनुमान’ जी से सीखें जीवन प्रबंधन के ये दस सूत्र!!!!!

हनुमान जी को कलियुग में सबसे प्रमुख ‘देवता’ माना जाता है। रामायण के सुन्दर कांड और तुलसीदास की हनुमान चालीसा में बजरंगबली के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसके अनुसार हनुमान जी का किरदार हर रूप में युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। हनुमान जी को कलियुग में सबसे असरदार भगवान माना गया है। हनुमान जी के बारे में तुलसीदास लिखते हैं ‘संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बल बीरा’। हमेशा अपने भक्तों को संकट से निवृत्त करने वाले हनुमान जी ‘स्किल्ड इंडिया’ के जमाने में युवाओं…

कौन से भगवान की पूजा किस फूल से करें, जिससे आपकी हर मनोकामना शीघ्र ही पूरी हो जाती है

कौन से भगवान की पूजा किस फूल से करें, जिससे आपकी हर मनोकामना शीघ्र ही पूरी हो जाती है श्रीगणेश- आचार भूषण ग्रंथानुसार भगवान श्रीगणेश को तुलसीदल को छोड़कर सभी प्रकार के फूल चढ़ाए जा सकते हैं। शंकरजी- भगवान शंकर को धतूरे के पुष्प, हरसिंगार,व नागकेसर के सफेद पुष्प, सूखे कमल गट्टे, कनेर, कुसुम,आक, कुश आदि के पुष्प चढ़ाने का विधान है। सूर्य नारायण- इनकी उपासना कुटज के पुष्पों से की जाती है। इसके अलावा कनेर, कमल, चंपा, पलाश, आक, अशोक आदि के पुष्प भी प्रिय हैं।भगवती गौरी- शंकर भगवान…

इक्यावन शक्ति पीठों में से एक माँ ज्वालामुखी देवी की कथा

इक्यावन शक्ति पीठों में से एक माँ ज्वालामुखी देवी की कथा हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा से 30 किलो मीटर दूर स्तिथ है ज्वालामुखी देवी। ज्वालामुखी मंदिर को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। ज्वालामुखी मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवो को जाता है। इसकी गिनती माता के प्रमुख शक्ति पीठों में होती है। मान्यता है यहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी। यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहाँ पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि पृथ्वी के…

माँ दुर्गा से सीखें नेतृत्व के यह छह गुण | डॉ0 विजय शंकर मिश्र

नवरात्रि में हम देवी दुर्गा के रूप में शक्ति की पूजा करते हैं। आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों के विजय के रूप में दशहरा मनाया जाता है। हमारे अंदर भी कुछ बुरी ताकतें होती हैं जो हमारी अच्छाई पर हावी होना चाहती हैं। ऐसे में बुराई पर अच्छाई को प्रबल बनाने का संकल्प लेकर हमारे अंदर के बेहतरीन लीडर को तलाश और तरास सकते हैं 1.निडरता और अंदरूनी शक्ति: दुर्गा शब्द दुर्गम से बना है जिसका तात्पर्य निडरता से है। चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति आ जाए, संकल्पों का साथ…

जानें माँ दुर्गा के नौ रूपों की महिमा एवं नवरा‍त्रि का महत्त्व

अगर रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता तो उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता नवरात्रि का अर्थ होता है, नौ रातें। हिन्दू धर्मानुसार यह पर्व वर्ष में दो बार आता है। एक शरद माह की नवरात्रि और दूसरी बसंत माह की इस पर्व के दौरान तीन प्रमुख हिंदू देवियों- पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कुष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री का पूजन विधि विधान से किया जाता है। जिन्हे नवदुर्गा कहते…

नवरात्रि में करें सिर्फ ये कार्य, आपके सभी मनोरथ होंगे पूर्ण-नवरात्र में बनेगें अनेक शुभ योग

17 अक्टूबर 2020 से शुरू होने वाले शरद नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग का संयोग बन रहा है। श्रीमद् देवी भागवत व देवी ग्रंथों के अनुसार इस तरह के संयोग का बहुत ही महत्व है नवरात्र के समय ऐसे योगो का दोगुना फल मिलता हैं । इसलिए यह नवरात्र देवी साधकों के लिए खास होते हैं दुर्गा सप्तशती दुर्गा सप्तशती का पाठ सुख शांति, समृद्धि, धन प्राप्ति, संतान प्राप्ति ,व्यापार वृद्धि और हर मनोकामना में सफलता प्राप्ति है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ…

बृहस्पति व्रत कथा, पूजा और उद्यापन विधि

हिन्दू धर्म में बृहस्पतिवार के दिन श्री हरी विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री हरी का व्रत और पूजन करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जल्द शादी करने की इच्छा रखे वालो के लिए भी ये व्रत बहतु लाभदायक होता है। अग्निपुराणानुसार अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से प्रारंभ करके सात गुरुवार तक नियमित रूप से व्रत करने से बृहस्पति ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा घर में सुख शांति और श्री विष्णु भगवान् का आशीर्वाद भी…

भारत के दस रहस्यमय मंदिर, कोई नहीं जान पाया अब तक इनके राज़

प्राचीनकाल में जब मंदिर बनाए जाते थे तो वास्तु और खगोल विज्ञान का ध्यान रखा जाता था। इसके अलावा राजा-महाराजा अपना खजाना छुपाकर इसके ऊपर मंदिर बना देते थे और खजाने तक पहुंचने के लिए अलग से रास्ते बनाते थे। इसके अलावा भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनका संबंध न तो वास्तु से है, न खगोल विज्ञान से और न ही खजाने से इन मंदिरों का रहस्य आज तक कोई जान पाया है। ऐसे ही 10 मंदिरों के बारे में हमने आपके लिए जानकारी जुटाई है। भारत में…

जानें ऊँ की ध्वनि का महत्व और नियमित अभ्यास से ठीक होने वाले शारीरिक रोग एवं विकार

एक घडी,आधी घडी,आधी में पुनि आध तुलसी चरचा राम की, हरै कोटि अपराध। 1 घड़ी= 24मिनट 1/2घडी़=12मिनट 1/4घडी़=6 मिनट क्या ऐसा हो सकता है कि 6 मि. में किसी साधन से करोडों विकार दूर हो सकते हैं। उत्तर है हाँ हो सकते हैं वैज्ञानिक शोध करके पता चला है कि सिर्फ 6 मिनट ऊँ का उच्चारण करने से सैकडौं रोग ठीक हो जाते हैं जो दवा से भी इतनी जल्दी ठीक नहीं होते छः मिनट ऊँ का उच्चारण करने से मस्तिष्क मै विषेश वाइब्रेशन (कम्पन) होता है और औक्सीजन का…