भूमि पूजन नहीं, सीएम योगी को इस कार्य के उद्घाटन के लिए न्यौता भेजेगा मस्जिद ट्रस्ट |

तू डाल डाल तो मैं पात पात वाली बात को संदर्भित करते हुए, 5 अगस्त को अयोध्या में रामजन्म भूमि पूजन के बाद उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा गठित ट्रस्ट इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ने कहा कि वह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित करेगा कि योगी जी आएं और अयोध्या में मस्जिद के बगल में बनाई जाने वाली सार्वजनिक उपयोगिता सुविधाओं( Public Utility facilities) का उद्घाटन करें।

गौरतलब हो कि IICF का ये बयान तब सामने आया है जब बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा हाल में यह स्पष्ट किया गया कि वो अयोध्या में मस्जिद के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

हालांकि, ट्रस्ट ने कहा कि मस्जिद की आधारशिला रखने की कोई रस्म नहीं होगी। IICF के प्रवक्ता अतहर हुसैन ने जानकारी दी है कि “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि मस्जिद निर्माण शुरू करने के लिए किसी भी आधारशिला कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं है। इसलिए मस्जिद निर्माण में कोई समारोह नहीं होगा। हालांकि, धनीपुर गाँव में हमें आवंटित 5 एकड़ ज़मीन में से, मस्जिद निर्माण केवल 15 हज़ार वर्ग फुट जमीन पर ही किया जाएगा।

हुसैन ने कहा कि “शेष क्षेत्र का उपयोग पुस्तकालय, इंडो-इस्लामिक रिसर्च सेंटर, धर्मार्थ अस्पताल और सामुदायिक रसोई केंद्र जैसी सार्वजनिक उपयोगिताओं के निर्माण के लिए किया जाएगा। एक बार जब हम इन सार्वजनिक उपयोगिताओं का निर्माण शुरू करने के लिए तैयार हो जाएंगे, तो हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को आमंत्रित करेंगे की मुख्यमंत्री ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में भाग लें। ट्रस्ट सामाजिक कारणों के लिए उनकी मदद भी लेगा।”

हुसैन ने यह भी उल्लेख किया कि बोर्ड कोई समय सीमा नहीं दे सकता है कि निर्माण कार्य कब तक शुरू हो जाएगा क्योंकि कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं और ट्रस्ट केवल आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर रहा है।

IICF के प्रवक्ता ने कहा कि जब भी धर्मार्थ अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं का निर्माण 5 एकड़ भूमि पर शुरू होगा, तो आईआईसीएफ उलेमाओं और यहां तक ​​कि देश के विभिन्न हिस्सों से द्रष्टाओं को आमंत्रित करेगा।

सूत्रों के मुताबिक, इस आयोजन के लिए बोर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित कर सकता है। हुसैन ने एक टीवी चैनल को बताया कि, “अगर हम जमीन पर निर्माण कार्य में मदद की पेशकश करने के लिए तैयार हैं तो हमें पीएम मोदी को आमंत्रित करने में खुशी होगी।”

इस मस्जिद को ‘बाबरी मस्जिद’ का नाम नहीं दिया जाएगा। ट्रस्ट के प्रवक्ता अतहर हुसैन ने कहा कि अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद का नाम ‘बाबरी’ नहीं रखा जाएगा और इस मुद्दे पर ट्रस्ट के सदस्यों के साथ चर्चा की गई है।

हुसैन ने कहा, “हमें प्रस्तावित मस्जिद की संरचना और डिजाइन को अंतिम रूप देना बाकी है। हम लखनऊ में अपना कार्यालय स्थापित करने के बाद इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हालांकि, इस्लाम के अनुसार किसी भी ‘मस्जिद’ को नाम देना अनिवार्य नहीं है।”

दरअसल हुआ यूं कि अयोध्या में भूमिपूजन के तुरंत बाद 5 अगस्त को एक चैनल को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह ध्वस्त बाबरी मस्जिद की जगह अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे।

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