मिट्टी के बैक्टीरिया बारिश की बूंदों से मिलकर देते हैं खुशबू, जाने मिट्टी की खुशबू का विज्ञान और प्रयोग।

बारिश अकेले नहीं मिट्टी की सुगंध के साथ आती है आपके आंगन मेंः सारिका घारू


पहली बारिश का एहसास ना केवल ठंडी बहुत बौछारें से होता है बल्कि मिट्टी की सोंधी-सोंधी सुगंध हर किसी का मन मोह लेती है. मानसून के आते ही इस सुगंध से साक्षात्कार होता है. मिट्टी की खुशबू का विज्ञान समझाते हुए विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने प्रयोगों का प्रदर्शन किया।

ऐसे कर सकते हैं प्रयोग
5 जार में अलग-अलग स्थानों की मिट्टी रेत ले करके उसमें कुछ पानी डालें, उसमें बन रहे बुलबुलों को हैंडलेंस की मदद से देखें. पांचों जार में से आरही खुशबू का अंतर महसूस करें.

विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि बारिश की बूंदों में कोई खुशबू नहीं होती है लेकिन जब यह मिट्टी से पहली मुलाकात करती है तो जो खुशबू आती है वैज्ञानिक भाषा में उसे पेरीकोट कहते हैं. खुशबू का विज्ञान बताते हुए सरकार ने जानकारी दी कि पेड़-पौधों के द्वारा कुछ तलीय पदार्थ उत्सर्जित किए जाते हैं और जो बैक्टीरिया मिट्टी में होते हैं उनके द्वारा भी खास केमिकल छोड़े जाते हैं. जब वे केमिकल बरसात की बूंदों के संपर्क में आते हैं तो उस से क्रिया करके हवा के छोटे-छोटे बुलबुलों के रूप में नजर आते हैं. इन बुलबुलों के फूटने पर हवा में बहुत छोटे-छोटे से एरोसॉल के रूप में बाहर निकलते हैं और वही अनुसार मनमोहक खुशबू बिखेर कर बारिश का अभिवादन करता है.

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