चौथा लॉकडाउन: जनता को मिल सकती हैं बड़ी रियायतें, लिमिटेड होंगी ट्रांसपोर्ट समेत दूसरी सेवाएं

चौथे लॉकडाउन में रेड जोन की संख्या कम होने की सम्भावना है। ऐसे में अगले लॉकडाउन मे जनता के लिये बड़ी रियायतें भी हो सकती हैं। सीमित ट्रांसपोर्ट सेवाएँ शुरु की जा सकती हैं।

प्रवासी मजदुर:
हालांकि, प्रवासी मजदूरों के पलायन से देश में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों ने सरकार की चिंताएं ज़रूर बढ़ा दी हैं। दरअसल पिछली बार की तुलना मे इस लॉकडाउन में राज्य सरकार ज्यादा जवाबदेह होंगे। वहीं वे अपने राज्य में हालात के हिसाब से ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन तय कर सकेंगे।

तीसरे लॉकडाउन की मियाद:
दरअसल तीसरे लॉकडाउन की मियाद 17 मई को खत्म हो रही है। वहीं लॉकडाउन का नया चरण 18 मई से शुरू हो जाएगा। फिलहाल ऐसा लगता है कि ये चरण सरकार के लिये आसान नही होने जा रहा। दरअसल उसमें सरकार के घोषित आर्थिक पैकेज के अमल की शुरुआत भी करनी है।

कामकाज तेज़ी से शुरू करने का दबाव:
ऐसे में फैलते इन्फेक्शन के बीच कामकाज तेज़ी से शुरू करने का दबाव भी है। संक्रमण के लिहाज से रेड, ग्रीन और ऑरेंज ज़ोन के लिये नियमों में तब्दीली भी की सकती है। पूरे जिले या फिर पूरे शहर को रेड जोन बनाने की जगह हॉट स्पॉट वाले क्षेत्रों में भी सख्ती रखी जा सकती है। वहीं इन इलाक़ों में सीमित कामकाज शुरू किया जा सकता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सेवा शुरू की जा सकेगी:
राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार तमाम मुद्दों पर विचार विमर्श कर लॉकडाउन के दिशा-निर्देश तय करने के साथ आर्थिक कामकाज का खाका भी खींच रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बार गैर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सेवा शुरू की जा सकेगी। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान मे रखते हुए स्पेशल ट्रेन की तरह लिमिटेड फ्लाइट सेवा और बस सेवा भी शुरू की जा सकती है। ऑटो_ टैक्सी ड्राइवर्स को भी सीमित इजाज़त दी जा सकती है। लेकिन हालत कुछ भी हों, एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए ट्रैवल पास होना बेहद जरूरी होगा।

लॉकडाउन को पूरे होंगे 54 दिन:
गौरतलब है कि 17 मई को लॉकडाउन के पूरे 54 दिन हो जाएंगे। ऐसे में अब आर्थिक काम के दबाव बढने के साथ उद्योग धंधे भी शुरू करने हैं। इतना ही नही, खेती- किसानी के काम के साथ सरकारी दफ्तर भी खोलने हैं और साथ ही दूसरे कामकाज भी शुरू किए जाने हैं। लेकिन अभी भी देशभर में संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वही खतरे का दर भी कई गुना ज़्यादा हो चुका है। ऐसे में साफ है कि सरकार जमीन पर हालात को सामान्य बनाते हुए ही आगे कोई भी कदम उठाएगी।

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